हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में स्किल्ड युवाओं के लिए जॉब के कई मौके

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नई दिल्ली. भारत में फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर का आकार काफी बड़ा है। इसमें कॉमर्शियल बैंक, बीमा कंपनियां, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, एनबीएफसी, म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड आदि शामिल हैं। इस क्षेत्र 2022 तक भारत में 16 लाख अतिरिक्त स्किल्ड वर्कफोर्स की जरूरत होगी। हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में कॅरियर को लेकर दैनिक भास्कर ने जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी की एमडी एवं सीईओ नीरा सक्सेना से बातचीत की।

युवाओं के लिए हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में किस तरह के रोजगार उपलब्ध हैं?
फ्रेशर्स के लिए एमबीए या फाइनेंस और मार्केटिंग से पोस्ट ग्रेजुएट किया होना चाहिए। हम फ्रेशर्स की ज्यादातर भर्ती कैम्पस रिक्रूटमेंट के माध्यम से करते हैं।

आपकी कंपनी जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस उम्मीदवारों में किस तरह के स्किल तलाशती है?
हम भर्ती करते समय कम्युनिकेशन स्किल, नेगोशिएशन स्किल, क्रिटिकल थिंकिंग, ऑर्गनाइजेशनल स्किल, लॉजिकल थिंकिंग, अकाउंटिंग, आईटी सॉफ्टवेयर नॉलेज, टेक-सेवीनेस और लीडरशिप शामिल हैं।

क्या आपकी कंपनी को योग्य टैलेंट की भर्ती में और उन्हें अपने साथ जोड़े रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है?
जी हां, ऐसे योग्य उम्मीदवारों की कमी है जो हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में काम करना चाहते हों। उनके पास प्रामाणिक फाइनेंशियल क्वालिफिकेशन और प्रमाणपत्र की भी कमी देखने में आती है। इसके अलावा आईटी नॉलेज और स्किल की भी कमी देखने में आती है।

क्या मौजूदा शिक्षा से नई पीढ़ी ऐसी तैयार हो रही है कि योग्य जॉब पा सके?
देश में ऐसी कोई भी शिक्षा प्रणाली नहीं है जो कंपनियां जिस तरह की स्किल्ड वर्कफोर्स चाहती है उसके मुताबिक स्टूडेंट्स को जॉब की प्रेक्टिकल ट्रेनिंग मुहैया कराती हो।

युवाओं को इंटरव्यू की तैयारी किस प्रकार करनी चाहिए?
कंपनी के वर्क कल्चर को समझें। जॉब के लिए किस तरह के स्किल की जरूरत है यह जानना जरूरी है। जिस पद के लिए इंटरव्यू देने जा रहे हैं उस काम की पूरी प्रकृति को समझना भी आवश्यक है।

क्या हाल के वर्षों में भर्ती की प्रक्रिया में किसी प्रकार का बदलाव आया है?
जी हां, बदलाव आया है। अब कंपनियां कैम्पस रिक्रूटमेंट और मैनपावर सप्लाई एजेंसियों के जरिये भर्तियां कर रही हैं।

एआई और बिग डेटा जैसी नई टेक्नोलॉजी से भविष्य में आप क्या बदलाव देखते हैं?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) फाइनेंशियल सर्विसेज इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव ला रही है। लगभग हर कंपनी समय की बचत, खर्च में कटौती और उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का इस्तेमाल शुरू कर चुकी है। बिग डेटा का मतलब है कि बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और बेहतर प्रोडक्ट्स की पेशकश कर सकते हैं।

मौजूदा परिदृश्य में किस तरह के जॉब पैदा हो रहे हैं? क्या भविष्य में इसमें किसी प्रकार का बदलाव होगा?
फाइनेंस में कॅरियर एक्साइटिंग और रिवार्डिंग है साथ ही आकर्षक भी। इस सेक्टर में प्रोफेशनल्स को डेट मार्केट, कैपिटल मार्केट, फ्यूचर्स व कमोडिटी, हेज फंड, विलय एवं अधिग्रहण शामिल हैं। इसके अलावा कम तनाव वाले क्षेत्र मसलन बैंकिंग एंड इंश्योंरेस सेक्टर और कॉरपोरेट फाइनेंस भी शामिल हैं।

फाइनेंशियल सेक्टर सालाना 8.5% दर से बढ़ रहा है

  • भारत दुनिया की तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसमें मजबूत बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर का अहम योगदान है।
  • म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। अप्रैल 2018 से फरवरी 2019 के बीच एयूएम 23.80 लाख करोड़ रुपए था।
  • भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) का निवेश नवंबर 2018 तक बढ़कर 6,310 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
  • पिछले कुछ साल में विलय-अधिग्रहण में खासी तेजी आई है। 2018 की पहली छमाही में 416.6 करोड़ डॉलर की 74 डील हुई।

इनमें रोजगार के अवसर हैं
हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में मोटे तौर पर चार अलग-अलग सेगमेंट में भर्ती करते हैं। इनमें क्रेडिट, डिस्बर्समेंट, कलेक्शन और सेल्स शामिल हैं। इसमें एक्जीक्यूटिव, सीनियर एक्जीक्यूटिव ग्रुप हेड, सीनियर ग्रुप हेड, एवीपी, वीपी, और एसवीपी तक पद होते हैं।

(इंटरव्यू कुमुद दास से बातचीत की आधार पर)

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नीरा सक्सेना।



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