स्लो फूड मूवमेंट के बाद बढ़ रहा स्लो टूरिज्म, एक ही जगह अधिक समय बिताकर रिलैक्स करने का ट्रेंड

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लाइफस्टाइल डेस्क. मानसून के मौसम में खिली हुई प्रकृति को देखने के लिए यात्रा करना लोगों को खूब भाता है। जानें विश्व पर्यटन दिवस की शुरुआत कैसे हुई। यह भी जानें कि स्लो टूरिज्म और सोलो टूरिज्म क्या है। इटली में स्लो फूड मूवमेंट के बाद टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए स्लो टूरिज्म की शुरुआत हुई। इसमें किसी एक स्थान पर अधिक समय तक रहकर यात्रा का आनंद लेना रिलैक्स रखने में सहायक होता है।

  1. पर्यटन सिर्फ हमारे जीवन में खुशियों के पल को वापस लाने में ही मदद नहीं करता है, बल्कि यह किसी भी देश के सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज के समय में जहां हर देश की पहली जरूरत अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है, वहीं आज पर्यटन के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था पर्यटन उद्योग के इर्द-गिर्द घूमती है। यूरोपीय देश, तटीय अफ्रीकी देश, पूर्वी एशियाई देश, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि ऐसे देश हैं जहां पर पर्यटन उद्योग से प्राप्त आय वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। जानें पर्यटन जुड़ी कुछ खास बातें। पर्यटन का महत्व और पर्यटन की लोकप्रियता को देखते हुए ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1980 से 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के तौर पर मनाने का निर्णय लिया। 27 सितंबर का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन 1970 में विश्व पर्यटन संगठन का संविधान स्वीकार किया गया था। पर्यटन दिवस की खासियत यह है कि हर साल लोगों को विभिन्न तरीकों से जागरुक करने के लिए पर्यटन दिवस पर विभिन्न तरीके की थीम रखी जाती है।

  2. स्लो टूरिज्म को इस उदाहरण से जानते हैं। राहुल मणिकर एक बिजनेसमैन हैं। तकरीबन एक साल पहले वे यूरोप टूर पर गए थे। बीस दिन की यात्रा के दौरान लंबे सफर और यहां-वहां की भागदौड़ के बीच उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि एक ही टूर में कई जगह घूमने के बजाय अगर एक बार में एक ही जगह सैर की योजना बना ली जाए तो आप सुकून के साथ उस जगह को एंजॉय कर पाते हैं। पिछले महीने वे पंजाब गए। लगभग दस दिन तक इसी जगह रहते हुए उनका कहना था कि यूरोप टूर से ज्यादा मजा उन्हें यहां आया। उनके इस टूर में घूमना ही नहीं बल्कि वहां की लोकल चीजों के बारे में जानना और आसपास के लोगों से मिलना-जुलना भी शामिल था। नए लोगों से मिलना होता है पसंद: टूर के दौरान नए लोगों से मिलना, नए व्यंजन और खानपान के तरीके जानना और एडवेंचर से भरपूर यात्रा करना हर कोई पसंद करता है। आमतौर पर अपने टूर के दौरान लोग कई शहरों या देशों की यात्रा का प्लान बनाते हैं। लेकिन इस धारणा को बदलने के लिए स्लो टूरिज्म का दौर चल पड़ा है। इसके अंतर्गत घूमने के लिए कई जगह पर जाने के बजाय एक ही जगह पर ज्यादा समय तक रुककर उसका आनंद लेना शामिल है।

  3. यात्रा करने का मकसद निश्चित रूप से आपकी रोजमर्रा की भागती-दौड़ती जिंदगी से राहत पाना है। लेकिन अगर वहां भी डेली रुटीन की तरह एक जगह से दूसरी जगह तक भागदौड़ कायम रहे तो सफर का मजा कम होने लगता है। स्लो टूरिज्म को पसंद करने वाले पर्यटक आनंद कुमार के अनुसार जिस जगह आप घूमने जा रहे हैं उसे कम समय में आप कितना जान पाएंगे, ये कहना भी मुश्किल है। स्लो टूरिज्म के अंतर्गत किसी एक जगह पर ज्यादा देर तक रहकर उसे जानना शामिल है। इस तरह आप यहां-वहां भागदौड़ करने से तो बचते ही हैं, साथ ही उस जगह के बारे में विस्तार से जान भी पाते हैं।

  4. घूमने का अनुभव ही आपको रोमांचित कर देता है। फिर एक जगह अधिक दिनों तक ठहकर आप उस स्थान से जुड़ी प्राचीन परंपराओं और एेितहासिक स्थलों के बारे में करीब से जान पाते हैं। अकेले यात्रा करने वाले युवा भी इस टूरिज्म को महत्व देते हुए एक ही जगह पर ज्यादा दिनाें तक रहना पसंद करने लगे हैं। इस तरह की यात्रा को वे रिलैक्स रहने और उस जगह के स्थानीय निवासियों से जुड़ने का बेहतर माध्यम भी मानते हैं।

  5. पिछले पांच सालों के दौरान स्लो टूरिज्म के मार्केट में 10% की वृद्धि हुई है। सबसे पहले इटली में स्लो फूड मूवमेंट के बाद स्लो टूरिज्म की शुरुआत हुई। दरअसल वहां कार्लो पेट्रिनी नामक शख्स ने ऑर्गेनिक फूड को बढ़ावा देने के लिए कम दामों में इसे बेचने का प्रस्ताव रखा ताकि लोगों तक क्वालिटी फूड पहुंच सके और वे सेहतमंद रहकर अच्छे खाने का मजा ले सकें। खाना ही नहीं, बेहतर क्वालिटी का टूरिज्म भी लोगों को मिले इसलिए स्लो टूरिज्म युवाओं के बीच काफी पाॅपुलर हो रहा है। साथ ही टूरिज्म का यह कल्चर आज के समय में प्रासंगिक हो रहा है।

  6. अपने एक जैसे रुटीन से ब्रेक लेकर एक ही जगह पर घूमना- फिरना और कुछ दिन रुकना समय का बेहतर इस्तेमाल भी माना जाता है। इसके लिए होटल का महंगा किराया देने के बजाय वहां कुछ दिनों के लिए किराए का मकान लेकर रहा जा सकता है। इस तरह आप कम पैसों में घर से दूर रहते हुए भी घर की तरह की रहने का मजा ले सकते हैं। साथ ही अपनी पसंद के अनुसार खुद खाना भी बना सकते हैं। स्लो टूरिज्म की योजना खासतौर से किसी विशेष त्योहार के करीब आने पर भी बनाई जा सकती है। इस तरह आप अपने त्योहार को घर से दूर रहते हुए हर साल से अलग कुछ नए अंदाज में मना सकते हैं।

  7. स्लो टूरिज्म का उद्देश्य स्थानीय स्थानों की सैर ही नहीं बल्कि ईको फ्रेंडली उत्पादों को करीब से जानना भी है। इस तरह आप उस स्थान विशेष से संबंधित चीजों और प्रकृति को करीब से जान सकते हैं। कल्चरल और ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी स्लो टूरिज्म महत्वपूर्ण है। कम यात्रा करना यानी कार्बन का उत्पादन कम होना, इसलिए पर्यावरण प्रेमी भी इस तरह के टूरिज्म को खूब बढ़ावा दे रहे हैं।

  8. आजकल समय के अभाव में कम समय में परिवार या दोस्तों के साथ एकसाथ छुट्टी लेकर ट्रेवलिंग पर जाना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में सोलो टूरिज्म का क्रेज भी काफी बढ़ा है। लोग अकेले ही देश-दुनिया में घूमने को तवज्जो देने लगे हैं। मल्टीनेशनल कंपनी से लेकर प्रायवेट सेक्टर में कार्यरत युवाओं की बड़ी संख्या ट्रेवलिंग की बेहद शौकीन हैं। घूमने-फिरने के शौक को अपनी तरीके से पूरा करने में वे कोई कमी नहीं रखना चाहते। इसलिए मौका मिलते ही विदशों की सैर करना उन्हें खूब भाता है। एक सर्वे के अनुसार महिलाएं सोलो ट्रेवलिंग के दौरान स्पा या वेलनेस रिट्रीट पर मनचाहा खर्च करने में कोई कमी नहीं छोड़ती हैं। जबकि पुरुष साइकिलिंग या सेलिंग ट्रिप का अनुभव मुंहमांगी कीमत देने के बाद भी लेना चाहते हैं। यानी सोलो ट्रेवलिंग ही वह दौर होता है जब आप अपने मनचाहे हर काम को पूरा करने में कोई कमी नहीं रखते। तेजी से बढ़ा ये मार्केट: सोलो ट्रेवलिंग को बढ़ावा देने के लिए बैंक की लोन स्कीम भी कारगर है। एक साल में दाे या तीन से ज्यादा यात्रा करने वाले एकल यात्री हॉलीडे लोन लेकर अपने इस शौक को पूरा करने में कोई बुराई नहीं समझते। एक लोन का पैसा उतारने के बाद वे दूसरे टूर की योजना भी इसी तरह बनाने में जुट जाते हैं।

  9. उत्तराखंड टूरिज्म केसीनियर एडवेंचर स्पोर्ट्स ऑफिसरजसपाल चौहान का कहना है किस्लो टूरिज्म के दौरान जो लोग घूमने आते हैं, उन्हें रहने के लिए कम बजट के आवासों की व्यवस्था की जानी चाहिए। कई बार विदेशों में भारत में योग या आयुर्वेदिक पद्धति सीखने जो लोग आते हैं, उन्हें लंबे समय तक रुकना होता है। ऐसे में रहने की उचित व्यवस्था न होने पर वे कई परेशानियों का सामना करते हैं।

    पर्यटन मंत्रालय केजॉइंट डायरेक्टर जनरल विकास रुस्तगी कहते हैं, भारत में टूरिज्म के प्रति लोगों का रुझान बढ़ने की वजह से पर्यटन पर कई विपरीत प्रभाव देखे जा रहे हैं। पेड़ काटकर बनाए गए रेस्त्रां भी इसी का हिस्सा है। इससे बचने के लिए लोकल और स्लो टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसी स्थान विशेष को बेहतर तरीके से प्रमोट किया जा सके। इस दिशा में टूर ऑपरेटर्स की भूमिका भी खास है।

  10. भारत जैसे देशों के लिए पर्यटन का खास महत्व होता है। भारत जैसे देश की पुरातात्विक विरासत या संस्कृति केवल दार्शनिक स्थल के लिए नहीं होती है इसे राजस्व प्राप्ति का भी स्रोत माना जाता है। साथ ही पर्यटन क्षेत्रों से कई लोगों की रोजी-रोटी भी जुड़ी होती है। आज भारत जैसे देशों को देखकर ही विश्व के लगभग सभी देशों में पुरानी और ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण दिया जाने लगा है।भारत असंख्य अनुभवों और मोहक स्थलों का देश है। केरल, शिमला, गोवा, आगरा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, मथुरा, काशी जैसी जगहें तो अपने विदेशी पर्यटकों के लिए हमेशा चर्चा में रहती हैं। भारत में अपने लोगों के साथ लाखों विदेशी लोग प्रतिवर्ष भारत घूमने आते हैं। भारत में पर्यटन की उपयुक्त क्षमता है। यहां सभी प्रकार के पर्यटकों को चाहे वे साहसिक यात्रा पर हों, सांस्कृतिक यात्रा पर या वह तीर्थयात्रा करने आए हों या खूबसूरत समुद्री-तटों की यात्रा पर निकले हों, सबके लिए खूबसूरत जगहें हैं।

  11. यही वजह है कि विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न शहरों में अलग-अलग योजनाएं भी लागू की गयीं हैं। भारतीय पर्यटन विभाग ने सितंबर 2002 में ‘अतुल्य भारत’ नाम से एक नया अभियान शुरू किया था। इस अभियान का उद्देश्य भारतीय पर्यटन को वैश्विक मंच पर प्रमोट करना था जो काफी हद तक सफल हुआ। इसी तरह राजस्थान पर्यटन विकास निगम ने रेलगाड़ी की शाही सवारी कराने के माध्यम से लोगों को पर्यटन का लुत्फ उठाने का मौका दिया। जिसे ‘पैलेस ऑन व्हील्स’नाम दिया गया।

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