सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए पीपीपी मोड ही बेहतर, सालाना आएगा 34 हजार करोड़ का खर्च

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कोलकाता. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड ही बेहतर है। इस योजना को देश भर में क्रियान्वित करने के लिए सालाना 34 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। द एसोसिएट चेंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया और ग्लोबल एडवाइजरी सर्विस फर्म अर्नस्ट एंड यंग ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही। द बिग डब्ल्यू इंपेक्टः इफैक्टिव अर्बन वेस्ट मैनेजमेंट सॉल्यूशन इन इंडिया शीर्षक से तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि आधुनिक और स्वस्थ शहरी जीवन के लिए सरकार को समग्र योजना बनानी होगी।

  1. स्टडी कहती है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए बड़े पैमाने पर फोकस किए जाने की जरूरत है। इसके लिए इसे स्वच्छ भारत अभियान में शामिल किया जाना चाहिए। जैसे शौचालय निर्माण का काम युद्ध स्तर पर किया गया, वैसे ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए काम करना होगा।

  2. रिपोर्ट कहती है कि शहरों को साफ रखना है तो पीपीपी मोड पर निजी कंपनियों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोग्राम में शामिल करना होगा। भारत के लिहाज से निजी कंपनियों को वेस्ट मैनेजमेंट का काम देना उचित ही रहेगा, क्योंकि यहां शहरी निकाय उतने सशक्त नहीं हैं।

  3. सूत्रों का कहना है कि काकरोच, मच्छरों को मारने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल, बल्ब व ट्यूबलाइट में उपयोग होने वाला पारा, घरों से निकले बायोमेडिकल वेस्ट अन्य कचरों से मिलकर भारी मात्रा में डंपिंग ग्राउंड पहुंच रहे हैं। इनसे निकलने वाले खतरनाक केमिकल जलाशयों, खेतों में जाकर प्रदूषण फैला रहे हैं। यह धीमा जहर हमारे जीवन को खत्म रहा है।

  4. स्टडीकहती है कि घरों से निकलने वाले कचरे से भी कैंसर और बांझपन जैसी बीमारियां हो रही हैं। इससे बचाव के लिएहर परिवार को सजग रहना होगा और कचरे को अलग करने की आदत डालनी होगी। थोड़ा सा समय निकाल कर यदि हम सभी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का काम करें तो कूड़ा निस्तारण जैसी शहर की एक बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।

  5. एक अनुमान के अनुसार भारत के 7935 शहरी क्षेत्रों में रहने वाले 37 करोड़ 70 लाख निवासियों के कारण प्रतिदिन 1,70,000 टन ठोस अपशिष्ट पैदा होता है। यह भी अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक जब शहरों में 59 करोड़ नागरिक हो जाएंगे और आबादी बढ़ने से शहरों की सीमाएं समाप्त हो जाएंगी तो प्राकृतिक शहरी अपशिष्ट का प्रबधंन करना मुश्किल होगा।

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      प्रतीकात्मक फोटो



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