सुप्रीम कोर्ट की ग्रुप को चेतावनी- आपको प्रोजेक्ट से बाहर कर इन्हें नोएडा-ग्रेटर अथॉरिटी को सौंप देंगे

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नई दिल्ली. आम्रपाली मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कई तल्ख टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने हजारों घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए ग्रुप को चेतावनी दी कि हम आपको आपकी 15 प्राइम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी से बाहर फेंककर नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को सौंप सकते हैं। अदालत ने कहा कि इन अथॉरिटी के पास किसी अन्य बिल्डर या डेवलपर से संपर्क कर रुके हुए प्रोजेक्ट को पूरा करने को कह सकते हैं। इनकी निगरानी में ही प्रॉपर्टी की बिक्री की जा सकती है। आम्रपाली ग्रुप ने 42 हजार घर खरीदारों को उनके घरों का पजेशन नहीं दे पाया है। सुप्रीम कोर्ट खरीदारों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

आम्रपाली ग्रुप ने कोई प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया- सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने कहा- आम्रपाली ग्रुप घर खरीदारों, नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और बैंकों के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभा पाने में नाकाम रहा। आपने (आम्रपाली ग्रुप) कभी कोई प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया और ना ही किसी प्रोजेक्ट में निवेश किया। हमें लगता है कि आपको आपकी प्रॉपर्टियों से बाहर फेंक देना चाहिए। हम इन प्रॉपर्टियों के अधिकार नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को दे देंगे। हम सबकुछ इन अथॉरिटी को दे देंगे। ग्रुप ने जमीनें गिरवी रखकर बैंक से जो कर्ज लिया है, वह वित्तीय संस्थानों द्वारा ग्रुप के निदेशकों या कॉरपोरेट गारंटर्स से इकट्ठा किया जा सकता है।

“खरीदारों का पहला हक हो, यह सुनिश्चित करेंगे’
बेंच ने कहा- हम यह निश्चित करेंगे कि कोई बैंक इन प्रॉपर्टियों के परिसर में ना जा सके और घर खरीदारों को इन संपत्तियों पर पहला अधिकार मिले। आम्रपाली ग्रुप ने खुद यह कहा था कि उन्होंने घर खरीदारों से 11,652 करोड़ रुपए लिए थे और 10,630 करोड़ रु. का निवेश किया। ग्रुप कैसे सारे प्रोजेक्ट को गिरवी रखकर हजारों करोड़ का कर्ज बैंकों से ले सकता है, जबकि वह खुद केवल प्रॉपर्टी डेवलप करने वाला एजेंट मात्र है।

बेंच ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के वकीलों से कहा कि वे इस संबंध में सभी जरूरी दस्तावेजों को इकट्ठा करें कि आम्रपाली ग्रुप द्वारा अब तक कितना रुपया दिया गया है। प्रोजेक्ट वार लीज अमाउंट, इंट्रेस्ट और ग्रुप को कितनी जमीन दी गई, इसके दस्तावेज भी जुटाएं।

बेंच ने रजिस्ट्री स्टाफ को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट उस वक्त हैरान रह गया, जब उसे पता चला कि उसके आदेश में फॉरेंसिक ऑडिटर का नाम बदल दिया गया है। बेंच ने रजिस्ट्री स्टाफ को चेतावनी दी- लोग कोर्ट के स्टाफ को प्रभाव में लेकर चालबाजी से हमारे आदेश बदलवाने की कोशिश कर रहे हैं। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अदालत ने इससे पहले भी फरवरी में अपने 2 कर्मचारियोंको आदेशों से छेड़छाड़ करने के लिए बर्खास्त कर दिया था। कर्मचारियों की छेड़छाड़ की वजह से आदेश में ऐसा लग रहा था कि एरिक्सन द्वारा दायर एक मानहानि के मामले में कारोबारी अनिल अंबानी को निजी तौर पर कोर्ट में पेश होने से छूट मिल गई।

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Supreme court warns Amrapali: Will throw you out; transfer ownership rights of properties



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