विराट के कप्तान बनने के बाद भी धोनी करते थे मार्गदर्शन: शिखर धवन

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नई दिल्ली (प्रेस विज्ञप्ति)। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास की अटकलों को दरकिनार करते हुए कहा कि यह फैसला उनके ऊपर छोड़ देना चाहिए। धोनी के संन्यास को लेकर अटकलें तभी से जारी हैं जबसे भारत के पूर्व कप्तान ने 2019 के वनडे वर्ल्ड कप के बाद खुद को चयन के लिए अनुपलब्ध कर लिया है। इंडिया टीवी पर शनिवार रात प्रसारित हुए शो ‘आप की अदालत’ में रजत शर्मा के एक सवाल का जवाब देते हुए धवन ने कहा, ‘धोनी इतने लंबे समय से खेल रहे हैं और मेरा मानना है कि वह जानते हैं कि उन्हें कब संन्यास लेना चाहिए। उन्हें अपना फैसला खुद करने दें। उन्होंने अपने करियर में भारत के लिए अब तक बहुत महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं और मुझे यकीन है कि वह समय आने पर वह इस बारे में फैसला करेंगे।’

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धवन ने धोनी की जमकर तारीफ की और कहा कि एक खिलाड़ी को निखारकर चैंपियन बनाने की उनकी क्षमता ने उनकी कप्तानी के दौरान भारत की सफलता में बहुत योगदान दिया है। धवन ने कहा, ‘यह एक बड़े नेता का गुण है। वह हर खिलाड़ी की क्षमता को जानते हैं, और उन्हें पता होता है कि किस खिलाड़ी का किस हद तक समर्थन करना चाहिए। वह जानते हैं कि किसी खिलाड़ी को चैंपियन कैसे बनाया जाए। उसकी कप्तानी के दौरान भारत की सफलता इसकी गवाही देती है। (धोनी का) कंट्रोल उनकी सबसे बड़ी क्वॉलिटी है।’ 2010 में धोनी की कप्तानी में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले धवन ने कहा कि मौजूदा कप्तान विराट कोहली सहित पूरी टीम रांची के इस दिग्गज खिलाड़ी को भरपूर सम्मान देती है। उन्होंने कहा, ‘धोनी भाई टीम के कप्तान के रूप में काफी सफल रहे हैं। हम सभी उनके बहुत आभारी हैं और हम उनका बहुत सम्मान करते हैं, और विराट का भी यही मानना है।’

धवन ने कोहली और धोनी के बीच की दोस्ती के बारे में भी बात की। धवन ने कहा, ‘जब विराट नौजवान थे, तो उन्होंने उनका काफी मार्गदर्शन किया। यहां तक कि जब वह कप्तान बने, तब भी धोनी भाई हमेशा उनकी मदद करते थे। यह एक लीडर की क्वॉलिटी है। यह देखना अच्छा लगता है कि विराट अब उनके प्रति अपना आभार व्यक्त कर रहे हैं।’ धवन, जो बेहद आकर्षक स्ट्रोक्स खेलने के लिए जाने जाते हैं और मैदान पर एक शोमैन के रूप में नजर आते हैं, ने भारतीय क्रिकेट के ड्रेसिंग रूम तक की अपनी यात्रा का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। धवन ने बताया कि कैसे 2010 में अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच से पहले विशाखापत्तनम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय मैच से पहले वह सो नहीं पाए और उन्हें नींद की गोली लेनी पड़ी थी। हालांकि, वह अपने पहले मैच में शून्य पर ही आउट हो गए थे।

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धवन सीरीज के पहले वनडे में ही डेब्यू करने वाले थे लेकिन बेंगलुरु में भारी बारिश के कारण मैच रद्द कर दिया गया था। धवन ने कहा, ‘डेब्यू से पहले मुझे रात को नींद नहीं आई थी। मैं परेशान था कि क्या मेरे अंदर अगले दिन खेलने लायक ताकत बचेगी। अगले दिन बारिश हुई और मैच को रद्द कर दिया गया। लेकिन मैं तब बहुत नर्वस था। और फिर, मैंने अगले मैच से पहले नींद की गोली ले ली। जब मैं अपने वनडे डेब्यू में शून्य पर आउट हुआ, तो मैं हंसता हुआ मैदान से बाहर आया। यह निराशाजनक था क्योंकि मैंने सोचा था कि मैं शतक जड़ूंगा।’ 33 वर्षीय धवन ने अब तक 133 वनडे मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, जिनमें उन्होंने 17 शतक जड़ते हुए कुल 5,518 रन बनाए हैं। वहीं, 34 टेस्ट मैचों में उन्होंने 2,315 रन बनाए हैं और उनके नाम 7 शतक दर्ज हैं। इस बीच 55 अंतरराष्ट्रीय टी20 मैचों में धवन ने 9 अर्धशतकों के साथ कुल 1413 रन बनाए हैं। शो के दौरान, धवन ने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों के बारे में भी बात की। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह हमेशा खेल को पूरी लगन के साथ खेलने और जीवन का आनंद उठाने पर ध्यान देते थे। 

एक प्रशंसक द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या कभी उन्हें जीवन में संघर्ष का सामना करना पड़ा, धवन ने कहा, ‘2010 में एक या दो मैच खेलने के बाद मैं बाहर हो गया था, लेकिन मैंने अपने जीवन में कभी संघर्ष का अनुभव नहीं किया। उन दिनों मैंने अपनी क्रिकेट को इंजॉय किया और दोस्तों के साथ मस्ती की। मैंने अपनी क्रिकेट, फिटनेस पर ध्यान केंद्रित किया और मुझे पूरी उम्मीद थी कि मेरा समय आएगा।’ पश्चिमी दिल्ली के रहने वाले धवन ने अपने बचपन के दिनों के बारे में भी खुलकर बात की और बताया कि उन्हें कैसे लगा कि वह क्रिकेटर बन सकते हैं। धवन ने अपने बचपन की शरारतों को याद करते हुए कहा, ‘मैं लेटर बॉक्स में पटाखे रख देता था। कभी-कभी, मैं चिट्ठियों को फाड़ देता था और उन्हें नाले में फेंक देता था। जाहिर है, ऐसी हरकतों के लिए मेरे माता-पिता मेरी पिटाई भी कर दिया करते थे। मेरे पिता चाहते थे कि मैं पढ़ाई करूं, लेकिन मेरा मन खेलकूद में लगता था। मैं परिवार में सबसे छोटा था, इसलिए मेरी मां को जब भी बाहर जाना होता था तो वह मुझे घर के अंदर बंद कर दिया करती थीं। लेकिन जब भी मेरे दोस्त क्रिकेट खेलने के लिए इकट्ठा होते थे, मैं घर के बाहर निकल जाता था। मेरी मां जब वापस आतीं और उन्हें पता चलता कि मैं बाहर निकल गया था, तो मेरी पिटाई भी होती थी।’

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अपने करियर के शुरुआती दौर के बारे में बात करते हुए धवन ने कहा, ‘जब मैं दिल्ली की अंडर-16 टीम के लिए चुना गया तो मुझे एहसास हुआ कि मैं एक पेशेवर क्रिकेटर बन सकता हूं। मुझे 2 मैचों के बाद हटा दिया गया था, लेकिन अगले साल मैंने खूब सारे रन बनाए और महसूस किया कि मेरा भविष्य क्रिकेट में है। अंडर-17 में मैं बांग्लादेश में एशिया कप में खेला था। उसके बाद से मैं सभी आयुवर्गों में नियमित खिलाड़ी रहा।’ धवन ने अपने ओपनिंग पार्टनर रोहित शर्मा के साथ अपनी अंडरस्टैंडिंग के बारे में भी बताया। उन्होंने 2019 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक मैच का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ‘विश्व कप के मैच के दौरान जब मुझे चोट लगी, तो मैंने रोहित से कहा कि मैं अब बड़े शॉट नहीं खेल सकता। मैंने कहा कि हमने टीम को जरूरी बेस दे दिया है और कहा कि अब मुझे वापस जाना चाहिए और अगले खिलाड़ी को आने देना चाहिए। लेकिन रोहित ने जोर देकर कहा कि मुझे रन बनाने के लिए रुकना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी साझेदारी अच्छी चल रही है और इससे टीम को मदद मिलेगी।’ 

धवन ने कहा, ‘और वास्तव में, हमने एक ठोस साझेदारी बनाई और रोहित के आउट होने के बाद भी मैं एक टूटे हुए अंगूठे के साथ खेलता रहा। मैंने दर्द को कम करने के लिए कुछ पेनकिलर्स का सहारा लिया और आखिरकार शतक बनाया। रोहित ने मेरी सेंचुरी में एक बड़ा रोल प्ले किया। उनकी सलाह ने उस पारी के दौरान मेरी बहुत मदद की।’ यह जोड़ी आखिरी बार दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई T20I सीरीज में एक साथ उतरी थी और इस साल नवंबर में बांग्लादेश के भारत दौरे पर फिर से अपनी इस भूमिका में उतरने की संभावना है। धवन ने आलोचनाओं के घेरे में चल रहे दिल्ली के खिलाड़ी ऋषभ पंत का भी समर्थन किया, जिनका हालिया प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। धवन ने कहा, ‘ऋषभ पंत बहुत प्रतिभाशाली हैं और मुझे यकीन है कि वह भारत के लिए एक लंबी पारी खेलेंगे। वह कड़ी मेहनत कर रहे हैं। कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि आप स्कोर नहीं कर पाते हं, लेकिन आप उनसे सीखते हैं। यह हर किसी के साथ होता है और मुझे यकीन है कि वह इससे सीखेंगे। वह एक अच्छे खिलाड़ी हैं और हमें अच्छे खिलाड़ियों का समर्थन करना चाहिए। यहां तक कि मैं भी अपने जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना किया है और अभी भी करता हूं। यह खेल का हिस्सा है।’ 



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