रिटायर कर्नल ने कहा- इस्लामिक स्टेट की पनाहगाह बन चुका है पाकिस्तान

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वॉशिंगटन. अमेरिकीरिजर्व आर्मी के रिटायर कर्नल लारेंस सेलिन का कहना है कि इस्लामिक स्टेट के आतंकियों के लिए पाकिस्तान एक मनमाफिक पनाहगाह बन चुका है। अमेरिकी दखल खत्म होने से अब आईएसआईएस को और ज्यादा फलने फूलने का मौका मिलेगा। सेलिन का यह लेख अमेरिकी मैगजीन,द नेशनल इंटरेस्ट में प्रकाशित हुआ है। उनका दावा है कि पाक सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की वजह से इस्लामिक स्टेट का प्रभुत्व अब बहुत ज्यादा बढ़ चुका है और दक्षिण एशिया के लिए यह गंभीर खतरा है।

  1. लारेंस का कहना है कि फिलहाल अफगानिस्तान में सक्रिय इस्लामिक स्टेट का जन्म पाकिस्तान में हुआ था। 2010 में पाक सेना की कार्रवाई के बाद तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सदस्यों ने अफगानिस्तान के सीमांत इलाकों में शरण ली। इन लोगों ने ही इस्लामिक स्टेट की आधारशिला रखी।

  2. इस्लामिक स्टेट के झंडे तले हजारों पाकिस्तानियों ने सीरिया की लड़ाई में भाग लिया था। 2013 में इन लोगों के वापस लौटने का सिलसिला शुरू हुआ था। जनवरी 2015 में इस्लामिक स्टेट ऑफ खोरासन प्राविंस (आईएसकेपी) की कमान टीटीपी के पूर्व कमाांडर हाफिज सईद को सौंप दी गई। तब संगठन के कुल 12 सदस्य थे, जिनमें से नौ पाकिस्तानी थे।

  3. लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल जियाउल हक ने इस्लामीकरण को बढ़ावा देना शुरू किया था। 70 के दशक में उन्होंने शेरिया जैसे कानून के साथ मदरसों को बढ़ावा दिया। इनके जरिए राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का कार्यक्रम बनाया गया। इस दौरान दूसरे धर्मों को पूरी तरह से दबा दिया गया था। जियाउल हक के समय में ये अतिवादी संगठन बहुत ज्यादा ताकतवर हो गए थे।

  4. शिया समुदाय के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाने के लिए पाक में सिपाह-ए-सहाबा (एसएसपी) का गठन किया गया। यह देवबंदी विचाराधारा से प्रभावित संगठन है। पाकिस्तान में इसके प्रसार में सऊदी अरब ने अपना अहम योगदान दिया। जब यह संगठन कारगर न रहा तब इससे जुड़े आतंकियों ने लश्कर-ए-झांगवी (एलईजे) को खड़ा कर दिया।

  5. हालांकि, इसके कुछ समय बाद लश्कर-ए-झांगवी अल-अलामी के नाम से आतंकी संगठन बना। यह एलईजे की तुलना में ज्यादा कट्टर था। बलोचिस्तान में हुए धमाकों के पीछे इसका हाथ रहा है। कर्नल लारेंस का कहना है कि इन दोनों संगठनों से जुड़े आतंकी अब इस्लामिक स्टेट में अपनी जगह बना चुके हैं।

  6. इसी तरह का एक और आतंकी संगठन लश्कर-ए- खोरासन है। यह ड्रग्स की तस्करी करने के साथ अल्पसंख्यकों को अपना निशाना बनाता आ रहा है। लारेंस का कहना है कि अमेरिका ने अफगानिस्तान से तो इस्लामिक स्टेट का तकरीबन खात्मा कर दिया, लेकिन उसने पाक में मौजूद इस आतंकी संगठन पर ध्यान नहीं दिया। उनका मानना है कि अमेरिका की यह लापरवाही घातक भी हो सकती है।

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      प्रतीकात्मक फोटो



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