राजशाही हटाने के लिए एक गुट 30 साल से सक्रिय, कहा- राजा के नाम लड़े गए युद्धों के प्रायश्चित का यही तरीका

0
140





टोक्यो. जापान का राजतंत्र दुनिया में सबसे पुराना माना जाता है। हाल ही में 59 साल के नारुहितो देश के 126वें राजा बने। राजपरिवार अपने नए राजा के समारोह में व्यस्त है। इस बीच कार्यकर्ताओं का एक गुट हान तेनोसी रेनराकु काई देश में राजशाही का विरोध कर रहा है। इसे एंटी-एंपरर एक्टिविटीज नेटवर्क या हेंतेनरेन भी कहा जाता है। यह गुट बीते 30 साल से राजशाही को हटाने के लिए संघर्ष कर रहा है। हेंतेनरेन का कहना है कि 1930 और 1940 के दशक में कई युद्ध लड़े गए। उन युद्धों के प्रायश्चित का यही तरीका है कि राजशाही देश से खत्म हो जाए।

  1. द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) के बाद से जापान के राजा को वहां के लोग भगवान मानते हैं। राजपरिवार को सूर्य की बेटी अमातेरासू की संतान माना जाता है। वहीं, हेंतेनरेन का टोक्यो में ही छोटा दफ्तर है। गुट में काफी कम लोग ही हैं।

  2. हेंतेनरेन के सदस्य नोमुरा केवल अपना सरनेम बताते हैं। उन्हें डर है कि पूरा नाम बताने पर दक्षिणपंथी लोग उन पर हमला कर सकते हैं। नोमुरा के मुताबिक- हिरुहितो ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मानवता के खिलाफ काफी अत्याचार किए। उन्हें तो युद्ध अपराधी कहना चाहिए। उनका (हिरुहितो) की सेना में काफी दिलचस्पी थी। वे केवल अमेरिका और ब्रिटेन से डरते थे। उनका मानना था कि जापान की सेना उनसे कमतर है।

  3. नोमुरा बताते हैं- हमारे समर्थक काफी कम हो रहे हैं। 1980 के दशक की रैलियों में 3 हजार तक प्रदर्शनकारी जुड़ जाते थे लेकिन अब युवाओं को आकर्षित करना मुश्किल है। हाल ही में हुई रैली में बमुश्किल 80 लोग जुटे। हम एक अलोकप्रिय लक्ष्य के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन लोगों को राजशाही की समस्याओं के बारे में शिक्षित करना जरूरी है।

    Japan

  4. नोमुरा यह भी कहते हैं- मौजूदा वक्त में जापान अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है क्योंकि अर्थव्यवस्था गिर रही है। शिंजो आबे की अगुआई वाली सरकार और दक्षिणपंथी धड़ा मानता है कि सम्राट उन्हें वैधता प्रदान कर सकता है।

  5. अमेरिकी लिखित संविधान के तहत जापान एक संवैधानिक राजतंत्र बन गया। इसमें सम्राट को राज्य के प्रतीक के रूप में मान्यता दी गई। उसे राजनीति में शामिल होने की मनाही थी। नोमुरा के मुताबिक- जापान के राजतंत्र का मतलब है कि हिरुहितो युद्ध में अंजाम दिए गए अपने कामों के लिए कभी भी जिम्मेदार नहीं होंगे।

  6. हिरुहितो के बाद जापान में राजतंत्र विरोधी आवाजें मुखर होने लगीं। वामपंथी विचारधारा वाले लोग राजतंत्र के प्रतीकों पर छिटपुट हमले करने लगे। हाल ही में हिरुहितो के बेटे अकिहितो ने गिरते स्वास्थ्य के चलते पद से हटने का फैसला किया। उन्होंने अपने बेटे नारुहितो को सम्राट के पद पर काबिज किया। अकिहितो 1989 में गद्दी पर बैठे थे।

  7. अमेरिका के ओरेगन स्थित जैपनीज स्टडीज ऑफ पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर केन रुओफ कहते हैं कि अकिहितो ने अपने पिता के अत्याचारों पर मरहम लगाने की काफी कोशिश की। 1975 में क्राउन प्रिंस रहने के दौरान अकिहितो पत्नी समेत ओकिनावा के दौरे पर गए थे। ओकिनावा में एक लाख लोग मारे गए थे। उस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने शाही जोड़े पर हमला किया लेकिन उन्हें चोट नहीं आई। अकिहितो युद्धग्रस्त देशों में भी जाते रहे हैं।

  8. रुओफ के मुताबिक- अकिहितो के दौरान राजपरिवार की लोकप्रियता में जबर्दस्त इजाफा हुआ। कई सर्वे और पोल्स में कहा गया कि देश 70-80% लोग राजतंत्र के समर्थन में थे।

    1. Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


      राजशाही के खिलाफ प्रदर्शन करते रिपब्लिकंस।


      हाल ही में नारुहितो जापान के राजा बने।


      सम्राट अकिहितो (नारुहितो के पिता) को जापान में काफी सम्मान हासिल है।



      और पढ़ें

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here