मोदी ने अगला लोकसभा चुनाव लड़ने का संकेत दिया, कहा- 2024 के लिए नए काम लेकर जाऊंगा

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नई दिल्ली. राज्यसभा में बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 2024 लोकसभा चुनाव लड़ने के संकेत दिए। मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में जवाब दे रहे थे। मोदी ने आयुष्मान योजना का जिक्र करते हुए विपक्ष से कहा कि आप इसकी आलोचना ना करें। वे बोले कि 2024 के लिए नए काम लेकर जाने वाला हूं।

मोदी ने कहा- आयुष्मान भारत योजना का 30 लाख लोगों ने लाभ उठाया। अगर कोई कमी है तो आप मेरा ध्यान उस आकर्षित करिए। इस योजना को जितना मजबूत हम बनाएंगे, उतना ही हम गरीब को हम और ज्यादा गरीब होने से बचा पाएंगे। अगर गरीब मिडल क्लास के लिए नींव बना रहा है, कदम रख रहा है और घर में एक बीमारी आई तो उसकी 20 साल की मेहनत पानी में चली जाती है। हम मानवता का काम कर रहे हैं। अब आयुष्मान योजना की क्रेडिट मोदी ले जाएगा इसलिए आलोचना करना ठीक नहीं। अब मिल गया क्रेडिट, चुनाव का नतीजा आ गया और अब काम करो। 2024 के लिए नए काम लेकर जाने वाला हूं, आप चिंता मत करिए।

कांग्रेस ना जीत पचा पाती है, ना हार स्वीकार कर पाती है- मोदी

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि कोई नेता जनादेश का अपमान करता है तो दुख होता है। मोदी ने कहा कि सदन में कुछ नेता कहते हैंकि भाजपा और उसके सहयोगी जीत गए, लेकिन देश और लोकतंत्र हार गया। ये दुर्भाग्यपूर्ण हैं। मतदाताओं के फैसले पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? क्या वायनाड में हिंदुस्तान हार गया? क्या रायबरेली में हिंदुस्तान हार गया है? क्या अमेठी में हिंदुस्तान हार गया है? यानी कांग्रेस हारी तो देश हार गया।
  • मोदी ने गालिब का शेर पढ़ते हुए कांग्रेस और गुलाम नबी आजाद पर तंज कसा।उन्होंनेकहा, ”कुछ लाइनें कहना चाहूंगा। आजाद साहब को ये अच्छा भी लगता है। ताउम्र गालिब यह भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी, आइना साफ करता रहा’।”
  • प्रधानमंत्री ने कहा- कांग्रेस ने इतने सालों तक शासन किया है। आपमें कुछ ना कुछ ऐसी प्रॉब्लम है कि आप विजय भी नहीं पचा पाते। 2014 से देख रहा हूं कि आप पराजय को स्वीकार भी नहीं कर पाते हैं। भारत के लोकतंत्र में हर दल का अपना स्थान और महत्व है, उसका सम्मान होना चाहिए। लेकिन, ना हम पराजय को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं और ना ही हम विजय को बचाने का साहस रखते हैं।
  • मोदी बोले- कुछ लाइनें कहना चाहूंगा। आजाद साहब को ये अच्छा भी लगता है। ताउम्र गालिब यह भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी, आइना साफ करता रहा। मैं सार्वजनिक रूप से बोलचाल मेंसांसद गलत बातें बोलते हैं, उन्हें सुधारता हूं, आक्रोश भी व्यक्त करता हूं। यहां उपदेश दिया गया कि किसी कैंडिडेट को इस तरह से हरा दिया गया, किसी कैंडिडेट को उस तरह से हरा दिया गया। यहां तो कुछ पार्टियों का इतिहास है कि राष्ट्रपति के कैंडिडेट को भी हरा दिया गया। दूसरे को उपदेश देने से पहले अपने गिरेबान में झांकिए।”
  • “जब दिल्ली मेें सिखों को जला दिया गया, उस पार्टी के लोग आज भी दल में हैं, सम्मानित पदों पर हैं। बड़े-बड़े लोगों के नाम हैं इसलिए हमें उपदेश ना दें। मेरी पार्टियों के सदस्यों से कहता हूं कि किसी को अधिकार नहीं कि किसी के लिए कुछ भी बोल दें। ये शोभा नहीं देता।”

‘कांग्रेस को एनआरसी का क्रेडिट लेना चाहिए’
प्रधानमंत्री ने कहा, ”यहां पर एक ही चिंता का विषय है, क्रेडिट का और ये बड़ा भारी है। एनआरसी की चर्चा का क्रेडिट आप नहीं लेंगे। राजीव गांधी की सरकार ने असम एकॉर्ड में एनआरसी स्वीकार किया था। हमें सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया और हम लागू कर रहे हैं। आप क्रेडिट लीजिए ना। वोट भी लेना, क्रेडिट भी लेना… कुछ तो लीजिए। हम पूरी मेहनत से इसे लागू करेंगे। हमारे लिए ये वोट बैंक की राजनीति नहीं देश की एकता और अखंडता से जुड़ा मुद्दा है।”

‘आजादजी कुछ दिन तो गुजरात में गुजारिए’
मोदी ने कहा, ”यहां पर सरदार साहब को याद किया गया। हम भी मानते हैं सरदार साहब पहले प्रधानमंत्री होते तो जम्मू-कश्मीर समस्या ना होती, जो हालत गांवों की है, वो ना होती। उन्होंने रियासतों को एक किया, ये तथ्य कोई नहीं मिटा सकता। कांग्रेस के लिए उन्होंने जीवन खपा दिया, शुद्ध कांग्रेसी थे। गुजरात में चुनाव होता है, तो सरदार साहब पोस्टर में दिखते हैं। देश में चुनाव होता है तो कहीं नहीं दिखते हैं। मैं आग्रह करता हूं कि हमने दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी बनाया, आप एक बार जाइए श्रद्धा सुमन तो अर्पित करिए। आजादजी कुछ दिन तो गुजारिए गुजरात में।”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।



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