पंजे के कई किस्से- देवरहा बाबा, चंद्रास्वामी से बूटा सिंह तक शामिल

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नई दिल्ली (दिवाकर पाण्डेय).चुनाव के दौरान जब हम किसी को वोट देते हैं तो ईवीएम पर उसके नाम के आगे उसकी पार्टी का चुनाव चिह्न भी बना होता है। इसकी अहमियत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि एक ही चिह्न के लिए तमाम विवाद तक हो चुके हंै। कांग्रेस के हाथ के पंजे को लेकर तो ढेरों कहानिया हैं। बता दें कि पहले लोकसभा चुनाव (1952) में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (रुइकर) ने भी पंजा चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा था। इसकी स्थापना 1939 में सुभाष चंद्र बोस ने की थी। अब यह दल छोटे रूप में केवल पश्चिम बंगाल में सीमित रह गया है और इसका निशान बाघ के साथ हशिया है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी को अगस्त, 2013 में झाड़ू चिह्न मिला था। ये चुनाव चिह्न भी अपने आप रोचक कहानियां और इतिहास समेटे हुए हैं। आइए आप भी रूबरू होइए…..

कांग्रेस :दो बैलों की जोड़ी, गाय और बछड़े से लेकर पंजे का सफर

1885 में एओ ह्यूम ने की स्थापना

1952: 1952 के पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने हल के साथ दो बैलों की जोड़ी को अपना निशान बनाया। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार की लड़ाई में कांग्रेस 1969 में दो धड़ों टूट गई।

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1969:एक पार्टी कांग्रेस (ओ) बनी और दूसरी इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस (आर)। 1971 में चुनाव चिह्न को लेकर जब दोनों पार्टियां लड़ने लगीं तो चुनाव आयोग ने हल के साथ दो बैलों की जोड़ी को जब्त कर लिया। कांग्रेस (ओ) को तिरंगे में चरखा और कांग्रेस (आर) को गाय-बछड़ा चुनाव चिह्न मिला।

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1978:आपातकाल के बाद विपक्ष इंदिरा-संजय को गाय-बछड़ा कहने लगा। अब कांग्रेस (आर) ने नया निशान तलाशना शुरू कर दिया। पार्टी ने जनवरी, 1978 में अपना चुनाव चिह्न हाथ का पंजा कर लिया और पार्टी ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस’ बन गई। 1980 के चुनाव में कांग्रेस को 353 सीटों पर जीत हासिल हुई।

भाजपा :जनसंघ के चुनाव चिन्ह दीपक के बाद 1980 में खिला कमल

1951 में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी नेे की स्थापना

1951:भारतीय जनसंघ को पहले दीपक चुनाव चिह्न मिला था। यह अपने जन्म से ही मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी है। 1968 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निधन के बाद 1969 में अटल बिहारी वाजपेयी अध्यक्ष बने।

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1973:में कमान लाल कृष्ण आडवाणी को मिली। 1977 में जनसंघ, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाले भारतीय क्रांति दल का विलय होकर नई पार्टी बनी- जनता पार्टी। इसका चुनाव चिह्न ‘हलधर किसान’ बना। 30 महीने बाद ही जनता पार्टी टूट गई।

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1980:6 अप्रैल को अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में जनसंघ, भाजपा में तब्दील हो गया और चुनाव चिह्न कमल का फूल निर्धारित किया गया। कहते हैं कि इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लिया गया जब क्रांति की अलख जगाने के लिए कमल सहारा बना था।

किस्से ‘हाथ’ के

  • 1. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंदिरा अध्यात्मिक गुरु चंद्रास्वामी के पास गईं। उन्होंने आशीर्वाद के लिए अपना हाथ उठाया। इंदिरा ने वहीं से हाथ के पंजे को अपना लिया।
  • 2. इंदिरा गांधी, देवरहा बाबा के पास गई थीं। बाबा ने उन्हें हाथ उठाकर आशीर्वाद दिया था और इसी हाथ से कल्याण होने की बात कही थी।
  • 3. पत्रकार राशिद किदवई की किताब ‘बैलट-टेन एपिसोड्स दैट हैव शेप्ड इंडियाज डेमोक्रेसी’ के अनुसार पूर्व कांग्रेस महासचिव बूटा सिंह ने विजयवाड़ा में मौजूद इंदिरा गांधी को फोन किया। इंदिरा ने उनके बताए हाथ को हाथी समझ लिया। लेकिन बाद में पीवी नरसिम्हा राव ने पूरी बात समझ मामला सुलझाया।

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