चर्च में धमाका करने वाले फिदायीन ने तुर्की में ट्रेनिंग ली, गैराज में बनाए 11 बम

0
176





कोलंबो. श्रीलंका में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकी सक्रिय थे और हमले की साजिश रच रहे थे, लेकिन इस खतरे को जानते हुए भी इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि दो फिदायीन ट्रेनिंग लेने के लिए तुर्की और ऑस्ट्रेलिया गए थे। सेंट सेबेस्टियन चर्च में धमाका करने वाला फिदायीन मो. मोहामादू हस्तून तुर्की में ट्रेनिंग के लिए गया था। धमाकों के लिए उसने गैराज में घरेलू सामानों के जरिए 11 बम बनाए थे।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीलंका संकट के बेहद करीब था। लोग जानते थे कि आईएस उन्हें निशाना बनाने वाला है। कुछ लोग हैरान भी थे कि लगातार दी जा रही चेतावनियों को नजरंदाज किया जा रहा है। और, कुछ अब मानते हैं कि वास्तव में यह सरकार थी, जिसकी वजह से ये खामियां बनीं रहीं और इसी के चलते 251 लोगों की जान इन धमाकों में चली गई।

2016 में आईएस ने श्रीलंका में जड़ें जमाईं, खामियों का फायदा उठाया

  • रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में श्रीलंका के न्याय मंत्री ने सदन में यह जानकारी दी थी कि दो दर्जन से ज्यादा श्रीलंकाई आईएस ज्वाइन कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि यह श्रीलंका के लिए बेहद बड़ा खतरा हो सकता है।
  • इसके कुछ महीनों बाद मुस्लिम कम्युनिटी का एक दल पुलिस अधिकारियों से मिला। उन्हें 11 मसौदे सौंपे थे। इसमें जाहरान हाशमी पर कार्रवाई की बात कही गई थी। जाहरान हाशमी श्रीलंका में आईएस आतंकियों का मुखिया था।
  • अधिकारियों के मुताबिक, जाहरान फिदायीनों में से एक था और हो सकता है कि वह इस दल का मुखिया भी रहा हो। मुस्लिम प्रतिनिधियों ने बताया था कि जाहरान श्रीलंका के बौद्ध, क्रिश्चिनय और मुस्लिम तानेबाने को नुकसान पहुंचा रहा है।
  • अधिकारी अब एक-दूसरे पर चेतावनियों को नजरंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि किसी ने भी आईएस के बढ़ते खतरे पर गंभीरता नहीं दिखाई।
  • एक हफ्ता पहले भी पुख्ता जानकारियों और लगातार चेतावनियों के बावजूद किसी ने कदम नहीं उठाया, जिसकी वजह से जनता की जान बड़े संकट में फंस गई।
  • सदन को आईएस के संबंध में 2016 में जानकारी देने वाले पूर्व न्याय मंत्री विजयदास राजपक्षे ने कहा- मैं हताश हूं, लेकिन इससे भी ज्यादा मुझे दुख है। मैं उनकी (आईएस) गतिविधियों को करीब से देख रहा था। मैं जानता था कि आईएस हमले की तैयारी कर रहा है, लेकिन किसी ने मुझे नहीं सुना।

टीएटीपी से बनाए बम, इसका इस्तेमाल 2015 के पेरिस धमाकों में हुआ था
अधिकारियों ने सभी फिदायीनों की पहचान कर ली है। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से एक हस्तून था, जो सेबेस्टियन चर्च में धमाके से पहले पीठ पर बैग लेकर जाता नजर आया था। हस्तून और एक अन्य फिदायीन ने तुर्की और ऑस्ट्रेलिया में ट्रेनिंग ली थी।हस्तून ने गैराज में घरेलू चीजों की मदद से 11 बम बनाए थे। विस्फोटक में टीएटीपी का इस्तेमाल किया गया था। इस विस्फोटक के जरिए 2015 में पेरिस में भी धमाके किए गए थे।एक अन्य फिदायीन अब्दुल लतीफ जमील सीरिया गया था। लेकिन, माना जा रहा है कि वह सीरिया यात्रा के पहले ऑस्ट्रेिलया में ही कट्टरपंथी बन गया था। यहीं पर उसने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।

मसाला व्यापारी के बेटों ने धमाकों का पूरा खर्च उठाया

अधिकारियों ने बताया कि श्रीलंका के अमीर मसाला व्यापारी के दो बेटों इंसाफ और इलहाम इब्राहिम ने ही धमाकों का पूरा खर्च उठाया था। इलहाम के वाइस मेल से इस बारे में जानकारियां हासिल हुई हैं। अपनी पत्नी को किए इस वाइस मेल में इलहाम ने कहा था- मैं खुदा के पास जा रहा हूं।

2015 में प्रिंसिपल की सीरिया में मौत के बाद उथल-पुथल मची
रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में श्रीलंका के एक स्कूल प्रिंसिपल मो. मोहसिन शारहाज नीलाम की सीरिया में एयर स्ट्राइक के दौरान मौत हो गई। वह बेहद प्रतिष्ठित लोगों में शुमार था, लेकिन उसने आईएस का दामन थामा था। इसके बाद श्रीलंका की राजनीति में उथल-पुथल मच गई। चुनाव के दौरान मजबूत राजनेता महिंद्रा राजपक्षे को हार का सामना करना पड़ा, जिन्होंने श्रीलंका के दशकों लंबे गृहयुद्ध का अंत किया था। इसके बाद जगह मिली मैत्रीपाला सिरिसेना को।आईएस की गतिविधियों पर नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ ने कहा कि सैन्य मजबूती से आगे बढ़ने को लेकर सिरिसेना ने काफी तेजी दिखाई। उन्होंने कई अच्छे खुफिया अफसरों को भी किनारे कर दिया।

विशेषज्ञों ने कहा- आईएस की मदद के बिना धमाके संभव नहीं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाहरान हाशमी का जो वीडियो सामने आया है, उससे जाहिर होता है कि वह बाहरी मदद के लिए अपील कर रहा था। आईएस के झंडे के साथ उसकी तस्वीर भी यही इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह के विध्वंसक बमों का इस्तेमाल श्रीलंका में किया गया, उससे लगता है कि आईएस ने फिदायीनों को अपना अनुभव जरूर मुहैया करवाया था।
इंडोनेशिया में संघर्ष का नीतिगत विश्लेषण करने वाली सिडनी जोंस ने कहा- इस तरह के बम बनाने के लिए विशेषज्ञता हासिल करना जरूरी होता है। डेटोनेटर्स, जगह का चुनाव करने के लिए महारत चाहिए होती है। लोगों को अपनी जान दे देने के लिए तैयार करने में भी इसी की आवश्यकता होती है। इन सबके लिए आमने-सामने के प्रशिक्षण की जरूरत होती है।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


sri lanka blasts: How ISIS radicalized wealthy Sri Lankan Muslims,



और पढ़ें

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here