ग्रीन हाउस गैसों का इस्तेमाल कर तरल ईंधन फार्मिक एसिड बनाया, इससे बिजली बनती है

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टेक्सास. ग्रीन हाउस गैसों को कम करने की दिशा में टेक्सास की राइस यूनिवर्सिटी ने एक बड़ी खोज की है। इससे न केवल इन गैसों को दोबारा इस्तेमाल कर तरल ईंधन में बदला जा सकेगा, बल्कि इसके लिए इस्तेमाल किए जाने वाला इलेक्ट्रोलाइजर पूरी तरह रिन्यूएबल बिजली से ही काम करेगा। यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कैटेलिक रिएक्टर कार्बन डाई ऑक्साइड का इस्तेमाल कर उसे प्योर और गाढ़े फॉर्मिक एसिड में बदल देगा। राइस यूनिवर्सिटी के केमिकल और बायोमोलेक्यूलर इंजीनियर हाओटिआन वांग ने बताया कि अभी तक फॉर्मिक एसिड जिस तरह से बनाया जाता था उसमें इसे साफ करने के लिए बहुत ही महंगे और अत्यधिक ऊर्जा की खपत वाले तरीके का इस्तेमाल होता था।

अब सीधे ही कार्बन डाई ऑक्साइड को प्योर और गाढ़े फार्मिक एसिड में बदलने से इसके व्यावसायिक प्रयोग को भी बढ़ावा मिल सकेगा। वांग और उनका ग्रुप ग्रीन हाउस गैसों को उपयोगी चीजों में बदलने के लिए लंबे समय से काम कर रहा है।

  1. वांग ने बताया कि फॉर्मिक एसिड को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करके बिजली पैदा की जाती है, जिससे कार्बन डाई ऑक्साइड उत्पन्न होती है। इस कार्बन डाई ऑक्साइड का फिर रिसायकिल करके फॉर्मिक एसिड में बदल दिया जाएगा। फॉर्मिक एसिड का इस्तेमाल केमिकल इंडस्ट्री में अन्य केमिकल के लिए फीडस्टॉक के तौर पर भी इस्तेमाल होता है। साथ ही यह हाइड्रोजन के लिए स्टोरेज मटेरियल के तौर पर भी इस्तेमाल होता है।

  2. इसमें हाइड्रोजन को स्टोर करके कम मात्रा से भी अधिक ऊर्जा हासिल की जा सकती है। फॉर्मिक एसिड में स्टोर की गई एक घनमीटर हाइड्रोजन में सामान्य मात्रा में इतनी ही हाइड्रोजन के मुकाबले एक हजार गुना अधिक ऊर्जा होती है। हाइड्रोजन को कंप्रेस करना बहुत ही मुश्किल होता है, लेकिन इस तरीके से हाइड्रोजन से अधिक ऊर्जा मिल सकेगी।

  3. इसका इस्तेमाल हाइड्रोजन से चलने वाली कारों में हो सकेगा। वांग और उनकी टीम ने लगातार सौ घंटे तक नए रिएक्टर से फॉर्मिक एसिड बनाया, लेकिन इससे रिएक्टर को कोई भी नुकसान नहीं हुआ। वांग ने कहा कि अगर उन्हें ग्रीन एनर्जी मिलती रही तो वह इसे रिएक्टर से इस तरह का चक्र स्थापित करेंगे कि इससे कुछ भी वातावरण में न जाए।

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