क्या आप भी खाते हैं सफेद शक्कर?

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हेल्थ डेस्क.मीठे पदार्थ हमारी जिंदगी में नए शैतान के रूप में सामने आ रहे हैं। डॉक्टर्स से लेकर न्यूट्रीशनिस्ट तक सभी आगाह कर रहे हैं कि हम अपनी डाइट में जितना संभव हो सके, शुगरी पदार्थों का सेवन कम से कम करें। सवाल यह है कि क्या सभी तरह की शक्कर सेहत के लिए खराब होती है? और अगर इसका जवाब हां है तो फिर विकल्प क्या है?

  1. क्या व्हाइट शुगर का ऑप्शन ब्राउन शुगर हो सकता है? आइए पहले इस शुगर के बारे में जान लेते हैं। इस शुगर को थोड़ा कम प्रोसेस किया जाता है और इसलिए इसका रंग ब्राउन होता है। इसमें थोड़ी-सी मात्रा में कैल्शियम और मैग्नीशियम भी होते हैं। इसलिए यह व्हाइट शुगर से थोड़ी बेहतर है। लेकिन सेहत के लिए इतनी भी अच्छी नहीं है कि हम बगैर किसी चिंता के मनचाही मात्रा में इसे खा सके। इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम की थोड़ी मात्रा के अलावा और कुछ भी पोषक तत्व नहीं होते। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी बहुत हाई होता है। यानी इसका अधिक सेवन डायबिटीज के मरीजों के लिए तो घातक है ही, सामान्य लोगों को भी यह मोटा कर सकता है। इसलिए ब्राउन शुगर, व्हाइट शुगर का एक ऑप्शन तो हो सकती है, लेकिन इसे भी जितना कम से कम खाएंगे, उतना बेहतर रहेगा। कई बार ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें व्हाइट शुगर को ही ब्राउन कलर करके ब्राउन शुगर के नाम पर बेचा गया। तो खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना जरूरी है कि वह वाकई ब्राउन शुगर ही हो, नकली ब्राउन शुगर नहीं।

  2. गुड़ को शुगर का बगैर रिफाइन और बिना प्रोसेस किया हुआ प्रकार मान सकते हैं। इसका रंग गोल्डन ब्राउन से लेकर गहरा ब्राउन तक कुछ भी हो सकता है। यह उस गन्ने की गुणवत्ता पर निर्भर करता है, जिसके रस से गुड़ बनाया जाता है। इसके बारे में पारंपरिक धारणा यही है कि इसे खाने से तत्काल ऊर्जा मिलती है। भोजन के बाद इसका एक टुकड़ा खाने से यह पाचन रसों का स्राव करके भोजन को पचाने में मददगार होता है। इसके अलावा गुड़ में सभी लाभदायक मिनरल्स जैसे आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम और कैल्शियम आदि पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इसलिए अगर आपको मीठे का इस्तेमाल करना ही है तो व्हाइट शुगर और ब्राउन शुगर की जगह गुड़ का ही करें। लेकिन यहां भी डायबिटीज के मरीजों को कोई छूट नहीं है। उन्हें गुड़ भी उतना ही नुकसान कर सकता है, जितना नुकसान कि दोनों तरह की शुगर पहुंचा सकती है।

  3. घरों में सबसे ज्यादा प्रचलित शक्कर है व्हाइट शुगर जिसे टेबल शुगर भी कहते हैं। शुगर को गन्ने के रस से प्रोसेस करके बनाया जाता है। जो शुगर जितनी ज्यादा रिफाइंड और प्रोसेस्ड होगी, वह उतनी ही सफेद होगी, लेकिन साथ ही उतनी ही ज्यादा नुकसानदायक भी। सफेद झक्क चमचमाती शक्कर बहुत ज्यादा रिफाइंड, प्रोसेस्ड और ब्लीच की हुई होती है। इसी वजह से उसे आकर्षक रंग और टेक्स्चर मिलता है। लेकिन यही सफेद झक्क चमकती शक्कर सेहत के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक भी होती है। इतना नुकसान और कोई फूड नहीं पहुंचाता, जितना कि सफेद रंग की यह शक्कर पहुंचाती है। फूले हुए पेट और तोंद के लिए यह सफेद शक्कर ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। डायबिटीज के रोगियों के अलावा पीसीओडी (पॉलिसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम या पीसीओएस) की तकलीफ से परेशान महिलाओं को भी व्हाइट शुगर से दूर रहने को कहा जाता है।

    सवाल यह भी उठ सकता है कि आखिर व्हाइट शुगर के प्रति इतनी दुश्मनी क्यों? दरअसल, व्हाइट शुगर को सल्फर डाइऑक्साइड, कैल्शियम हाइड्रोक्लोराइड और फॉस्फोरिक एसिड से प्रोसेस किया जाता है। इन तीन केमिकल्स में से शुरू के दो केमिकल मनुष्य की सेहत के लिए काफी घातक हैं। व्हाइट शुगर को प्रोसेस करने के लिए जो ब्लीचिंग केमिकल्स इस्तेमाल किए जाते हैं, वे कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले होते हैं। इसलिए सबसे बेहतर यही है कि हम सफेद चमकीली और बड़े दाने की शक्कर को पूरी तरह से अवॉइड करें।

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