कोख में बेटियों का कत्ल रोकने पर है 'सांड की आंख' का असल निशाना, दिवाली पर होगी रिलीज

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बॉलीवड डेस्क. अनुराग कश्यप की अपकमिंग फिल्म ‘सांड की आंख’ के बारे में यह तो सभी को पता है कि इसमें बागपत शहर की रहने वाली शूटर दादी चंद्रो और प्रकाशी तोमर की कहानी दिखाई जाएगी। पर अब जानकारी मिली है कि इसमें एक इंपोर्टेंट सोशल मैसेज भी दिया जाएगा। फिल्म में बागपत में दो दशक पहले के माहौल में फैली कन्या भ्रूण हत्या की बुराई पर जोरदार प्रहार किया जाएगा। इसकी शूटिंग इन दिनों पुणे में चल रही है। तुषार हीरानंदानी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म की शूटिंग अगले दो दिनों में पूरी हो जाएगी।

  1. फिल्म से जुड़े सूत्रों की मानें तो इसकी कहानी में ऑन लोकेशन वैल्यू एडिशन किए गए हैं। इनिशियली कहानी सिर्फ चंद्रो और उनकी भाभी प्रकाशी तोमर के इर्द-गिर्द ही बुनी गई थी पर जब राइटिंग टीम को बागपत जिले के गांवों के बारे में पता चला तो वे आश्चर्यचकित रह गए। मेकर्स को पता चला कि दूरदराज के गांवों में भी शूटिंग रेंज हैं। वहां मिडिल और हाई स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे भी उस शूटिंग रेंज में निशानेबाजी सीखते हैं। इससे भी बड़ी बात यह थी कि दो दशक पहले तक वहां के हालत वैसी नहीं थे। उस दौर में वहां कन्या भ्रूण हत्या फैली हुई थी पर चंद्रो और प्रकाशी तोमर के करिश्मे के चलते लोगों की सोच बदली। लिहाजा इस पहलू को भी फिल्म में प्रमुखता दिखाया जाएगा।

    87 वर्षीय चंद्रो का रोल निभाएंगी 29 वर्षीय भूमि।
    15 सीनियर एक्टर्स ने नकारी स्क्रिप्ट तब जाकर हुई तापसी-भूमि की एंट्री।
    82 वर्षीय प्रकाशी तोमर का रोल 31 वर्षीय तापसी निभाएंगी।

  2. फिल्म से जुड़ी सबसे खास बात यह है कि इसके पहले शेड्यूल की शूटिंग में पूरे गांव ने मेकर्स का साथ दिया। प्रोड्क्शन टीम के एक कॉल पर गांव के वर्ल्ड फेम निशानेबाज टेक्निकल हेल्प देते रहे। पूरा गांव ग्राउंड जीरो बन गया था। लाइव लोकेशन और रियल लाइफ शूटर्स के लिए मेकर्स को कहीं और नहीं जाना पड़ा। बागपत से ही कई सारे असल शूटर्स को फिल्म में कास्ट कर लिया गया।

    • शूटर दादी के साथ उनकी देख-रेख में निशानेबाजी सीखी।
    • सबकी ट्रेनिंग असली बंदूकों और गोलियों से हुई।
    • गोबर के कंडे और उपले बनाने से लेकर घर के सभी कामों को सीखा।
    • साइकल चलाने से लेकर ट्रैक्टर चलानेे तक की ट्रेनिंग ली।
    • खेतों में फसल काटना समेत कई और मुख्य काम।
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      anurag Kashyap’s movie ‘Sand Ki Aankh’ that it will show the story is on preventing female feticide


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